26 May
                                बच्चों की किताबें कैसी हों
एक  दिन मैं अपने विद्यालय के पुस्तकालय में बैठी हुई थी वहां कक्षा तीसरी के बच्चे भी आए हुए थे पुस्तकालय की  अध्यक्षा ने उन्हें कुछ वर्कशीट करने को दी थी मैंने भी एक वर्कशीट से ले ली और मैं उसके प्रश्नों को देखने लगी फिर मैंने बच्चों की ओर  देखा वे  सभी उसे बड़ी प्रसन्नता से कर रहे थे , उन प्रश्नों के उत्तर  बड़े आराम से लिख पा रहे थे उसके बाद पुस्तकालय अध्यक्षा ने  उन प्रश्नों पर चर्चा की और मैं यह देख कर हैरान थी कि बच्चे कितनी उत्सुकता से उनका  जवाब दे रहे थे ये  सभी प्रश्न अंग्रेजी की कहानियों की किताबों से संबंधित थे बच्चे उनके पात्रों से कितने वाकिफ थे
चाहे वह सिंड्रेला की कहानी हो या पिनोकियो की, गुलिवर ट्रेवल की हो या फेमस फाइव की . science fiction में भी वे कितना अच्छा लिखते हैं । छोटे बच्चों  के पिक्चर बुक , फोनेटिक्स की किताबें , बच्चों की किताबों में भी कितनी श्रृंखलाएं उपलब्ध हैं । कक्षा छठी के बच्चे हैरी पॉटर की पूरी श्रृंखला पढ़ जाते हैं
 मैंने सोचा कि अगर यही वर्कशीट हिंदी में बनाई होती तो मैं कौन से प्रश्न देती बच्चे हिंदी भाषा में पौराणिक कहानियों के पात्रों  या शेख़चिल्ली , तेनालीराम, बीरबल या प्रेमचंद की कहानियों के इक्के दुक्के  पात्रों के अलावा किसे जानते होंगे जो इतने प्रसिद्ध हुए होंगे !
मेरे घर में भी हिंदी की कई कहानियों की किताबें  , पत्रिकाएँ  हैं पर जब भी बच्चों के सामने किताब पढ़ने को कहती तो हिंदी के बदले वे  अंग्रेजी की उठाना अधिक पसंद करते पूछने पर उन्होंने बताया कि जिस तरह की किताबें अंग्रेजी में है , उनके चित्र सुंदर है ,उनकी भाषा, इसकी कल्पना की दुनिया कितनी सुंदर तरीके से बयान होती है हिंदी में ऐसा नहीं दिखता हम कितनी भी कोशिश कर लें फिर भी  हम कविताओं एवं कहानियों में नैतिक बातें डाल देते हैं जो बच्चों को अच्छी नहीं लगती उनकी दुनिया कल्पना की दुनिया है, जादू की दुनिया है , हम वहां तक पहुंच नहीं पातेइसलिए आज जब हिंदी की पुस्तकों की बात आती है तो समझ नहीं आता कि बच्चे के  अभिभावक को किन किताबों की सूची दे किशोरों के लिए भी कोई ऐसी किताब नहीं समझ आती है जो बहुत प्रसिद्ध हुई हूं प्रेमचंद की कहानियों को  अभिभावक पसंद करते हैं, उन्हें खरीदकर भी दे देते हैं ,लेकिन बच्चे उसे पढ़ना पसंद नहीं करते क्योंकि समय ,काल ओर परिवेश में अंतर आ चुका है
मुझे लगता है कि अगर प्रकाशक picture book में पैसा लगाएं, अच्छे , आकर्षक चित्र बने हों, नए लेखकों  को मौका दिया जाए , बच्चों की  सोच को समझा जाए , marketing strategy  अपनाई जाए तो स्थिति में सुधार हो सकता है। क्लिष्ट भाषा के बदले सरल एवं  चित्रात्मक भाषा का प्रयोग होना चाहिए।  यह एक बहुत बड़ी चुनौती है जिसे हम सब को समझना होगा
मुझे चाहिए वह किताब
मुझे चाहिए वह किताब ,
जिसमें हों प्रकृति के सुन्दर दृश्य,
जहाँ मैं कल्पना के घोड़ों पर बैठ दूर- दूर जा सकूँ ,
जो मेरे मन में प्रश्न उत्पन्न करे, 
जहाँ ज्ञान हो, 
विज्ञान हो, 
आनंद हो,
समस्याएँ हों ,
समाधान हों ,
कहानियाँ जो परियों की हों ,
कहानियाँ जो वैज्ञानिकों की हों, 
कहानियाँ जिनमें दादा- दादी हों ,
कहानियाँ जिनमें नाना- नानी हों ,
कहानियाँ जो रिश्तों की हों ,मित्रों की हों ,
कहानियाँ जो मेरी दुनिया की हों ,
जहाँ कंप्यूटर और इंटरनेट की बातें हों ,
मोबाइल हों , आई पैड हो , रॉकेट हों,
तो साइकिल हों , फूल हों , पौधे हों, पक्षी भी हों ,
ऐसी किताब जो मेरी दुनिया को जाने ,
ऐसी किताब जो मुझे समझे।
उषा छाबड़ा

www.ushachhabra.com

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Calling all Educators & Librarians!

Learn to use Puppets and Stories for Joyful Learning.
Understand the basics of Storytelling, its importance and role of puppets in storytelling. We will also make a puppet as an activity in the end.

Day and date- Sunday, 30th  August, 2026

Resource person- Ms. Usha Chhabra

Time- 4pm to 5.30 pm
Charges - Rs. 499 ( To be paid via Gpay 9899724872 and send the screenshot at the same number.)
The zoom Link will be shared on Sunday, 30 August, by 11 am.
The certificate will be given after attending the full session.